इस्लामिक जिहाद: जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और गुलामी की विरासत"/ Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery"

एम. ए. खान की पुस्तक "Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery" एक विवादास्पद पुस्तक है जो इस्लाम के जिहाद के सिद्धांत की अपनी व्याख्या प्रस्तुत करती है।

**पुस्तक के बारे में मुख्य बातें:**

* **लेखक:** एम. ए. खान (पूर्व मुस्लिम)

* **प्रकाशन तिथि:** 1 जून 2011 (Felibri.com द्वारा प्रकाशित)

* **मुख्य विषय:** पुस्तक इस बात पर केंद्रित है कि कैसे जिहाद, इस्लाम के जन्म से लेकर आज तक, गैर-मुसलमानों को वश में करने, उन्हें परिवर्तित करने और इस्लामी शासन का विस्तार करने का एक तरीका रहा है। लेखक का तर्क है कि पैगंबर मुहम्मद ने जिहाद के इन सिद्धांतों का पालन किया और अपने अनुयायियों के लिए एक आदर्श स्थापित किया।

* **लेखक का दृष्टिकोण:** एम. ए. खान का दावा है कि उन्होंने इस्लाम छोड़ दिया क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि यह "जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और गुलामी" पर आधारित है, जो जिहाद की मुख्य मांगें हैं।

* **समीक्षाएं:**

    * पुस्तक को कुछ पाठकों द्वारा "बहुत तथ्यात्मक, निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण" और "आई-ओपनर" के रूप में सराहा गया है।

    * कई समीक्षकों का मानना है कि यह इस्लाम और दुनिया के साथ उसके संबंधों को समझने के लिए एक "आवश्यक पुस्तक" है।

    * कुछ समीक्षकों ने इसे "बहुत अच्छी तरह से शोधित" लेकिन "बहुत अच्छी तरह से नहीं लिखी गई" बताया है।

संक्षेप में, यह पुस्तक जिहाद की अवधारणा पर एक विशेष दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसे लेखक एक पूर्व मुस्लिम के रूप में देखते हैं, और इसका उद्देश्य इस्लाम के इतिहास और उसके प्रसार के तरीकों पर प्रकाश डालना है।


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